इस स्तोत्र के पहले 41 श्लोक, तंत्र साधना और आंतरिक आनंद से जुड़े हैं जो मुख्य रूप से उच्च आध्यात्मिक दर्शन के बारे में है। बाद के 59 श्लोक में देवी के अंगों के अद्भुत सौंदर्य और रूप का मनमोहक वर्णन मिलता है। इस स्तोत्र के पठन से साधक को शरीर के चक्रों को संतुलित करने में मदद मिलती है। इससे व्यक्ति के व्यक्तित्व में पॉज़िटिव ओरा बढ़ती है और माँ त्रिपुरसुंदरी की कृपा प्राप्त होती है जिससे साधक को साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त होती है।
यह 15 अक्षरों का मंत्र वेदों, महावाक्यों और उपनिषदों की प्रकटियों का एक सुंदर संयोग है। यह सत्विदानंद की ओर ले जाने वाला मार्ग है। इस सार को शैव, वैष्णव, सौर और गणपत्य मंत्रों के साथ भी जोड़ा गया है। श्री पंचदशी मंत्र में कुल १५ अक्षर होते हैं, जो तीन खंडों में विभाजित किये गए हैं। इस स्तोत्र के प्रत्येक २० नाम पंचदशी मंत्र के एक-एक विशेष अक्षर या पद से समन्धित हैं। इस स्तोत्र के ३०० नाम है। सभी ३०० नाम पंचदशी मंत्र के सर्व वर्णों से शुरू होते हैं, जो केवल नाम ही नहीं बल्कि मंत्र भी है।
SAUNDARYALAHARI
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