इस कार्य में, प्रत्येक नाम या नामों के समूह के अर्थ ललिता सहस्रनाम स्तोत्र की कविता में बुने गए हैं। उपासक इसे पढ़ सकते हैं, सीख सकते हैं, और स्तोत्र का सार आत्मसात कर सकते हैं, जिससे उनकी संज्ञानात्मक क्षमता बढ़ती है और उनकी साधना उन्नत होती है। ललिता सहस्रनाम स्तोत्र अनंत चेतना को समझने के लिए, एक आध्यात्मिक अंतर्मुखता, मौलिक, सर्वव्यापी और अद्वैत चेतना स्थिति की समझ पाने के लिए और संज्ञानात्मक सुधार, कार्मिक शुद्धि और आंतरिक परिवर्तन के लिए एक दिव्य ग्रंथ है।
ललिता सहस्रनाम स्तोत्र माता त्रिपुरासुंदरी के एक हजार दिव्य नामों एवं गुणों का वर्णन करता है। ब्रह्माण्ड पुराण में स्थित इस स्तोत्र को वाग्देवताओं द्वारा रचा गया था। इस ग्रन्थ में दी गई गुण श्रेणियाँ मिलकर माता त्रिपुरासुंदरी के सभी 1000 नामों को समायोजित करती हैं। हर नाम के साथ मंत्रजप या पूजन, अर्चन चढ़ाने की सामान्य प्रथा है। इस दिव्य शास्त्र को माता के प्रत्येक नाम (गुण) की पूरी और सही समझ के साथ बार-बार उच्चारित किया जाता है, जिससे क्त की मानसिक क्षमता में वृद्धि होती है और उसके भीतर परिवर्तन और शुद्धि होती है। यह भक्त की आध्यात्मिक यात्रा का एक हिस्सा है, जिसमें वह देवी के सगुण और निर्गुण गुणों को सीखता है।
SHRI LALITA SAHASRANAMA
₹1,700.00 ₹1,530.00
Availability: 3 in stock












Reviews
There are no reviews yet.